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Thursday, 27 July 2023

वृष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 वृष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023


वृष राशि वाले जातकों के लिए यह वर्ष मध्यम फलदायक है। हालाँकि इस वर्ष वृष राशि वाले जातकों के जीवन में अर्थार्जन के मार्ग प्रशस्त होंगे साथ ही विद्यार्थियों के विद्यार्जन में उपस्थित विघ्न-बाधायें दूर होंगी। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। विवाह के इच्छुक लोगों के जीवन साथी के अन्वेषण की दिशा में चल रहे प्रयास सफल होंगे तथा संतान से उत्तम सुख की प्राप्ति होगी। व्यापार में बाधा होगी लेकिन आजीविका के स्रोत बढ़ेंगे, उच्चाधिकारियों से सम्पर्क होगा, व्यवसाय में लाभ एवं न्यायालीय कार्यों में सफलता मिलेगी। स्वजनो से विवाद संभव है परन्तु भूमि-भवन वाहन की प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास सफल होंगे। स्वास्थ्य में बाधा तथा उदर विकार संभव है। अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही आपको चिकित्सालय तक पहुँचा सकती है। माता-पिता का स्वास्थ्य कुप्रभावित हो सकता है, इस विषय में विशेष ध्यान दें। इस वर्ष कई धार्मिक व माङ्गलिक कार्य होंगे। वर्ष के उत्तरार्द्ध में आर्थिक प्रगति होगी तथा यश में वृद्धि होगी। आकस्मिक रुप से पारिवारिक सुख में बाधा पहुँचने से कष्ट होगा। सरकारी कर्मचारियों का स्थान परिवर्तन तथा पदोन्नति का योग है। सुरक्षा कर्मियों हेतु यह वर्ष कष्टकारी होगा। वर्ष के फरवरी, मार्च, जून, अक्टूबर मास कष्टदायी होंगे। 



इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि वृष से दसवीं राशि है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से दसवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

दुर्व्यापारप्रवित्तिं कलयति दशमे मानभङ्गं रुजं वा ।[1]

अर्थात् – जब  शनि जन्मराशि से दसवीं राशि में गोचर करता है तब जातक को ऐसे व्यापार में प्रवृत्त करता है जो उसके अनुकूल नहीं है और ऐसे व्यापार में प्रवृत्त होकर जातक कई तरह के नुकसान उठाता है अथवा कुछ परिस्थिति ऐसी उत्पन्न हो जाती है कि व्यक्ति गलत काम कर बैठता है और अपमान तथा नुकसान प्राप्त करता है। साथ ही   दशमराशिगत शनि मानभंग कराता है और बहुत कष्टकारी रोग भी देता है।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः वृष से ग्यारहवीं और बारहवीं है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से बारहवीं राशि में बृहस्पति गोचर का अशुभफल तथा ग्यारहवीं राशि में बृहस्पति गोचर का शुभफल बताया है।

लाभे पुत्रस्थानमानादिलाभो ।[3] 

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि से ग्यारहवीं राशि में गोचर करे तो पुत्र लाभ होता है, स्थानलाभ (नयी जगह जाना, नया पद मिलना आदि) होता है तथा सम्मान की वृद्धि होती है।

रिःफे दुःखं साध्वसं द्रव्यहेतोः ।[4]

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि से बारहवीं राशि में गोचर करे तो द्रव्य सम्बन्धी दुःख तथा भय, चिन्ता, उद्वेग आदि अशुभ फल होते हैं ।

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो वृष राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में शुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी वृष राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[5] यह दोनों राशियाँ क्रमशः वृष से बारहवीं और ग्यारहवीं है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से बारहवीं राशि में राहु गोचर का अशुभफल तथा ग्यारहवीं राशि में राहु गोचर का शुभफल बताया है।[6] जन्म राशि से ग्यारहवीं राशि में स्थित राहु सौभाग्य तथा जन्मराशि से बारहवीं राशि में स्थित राहु व्यय प्रदान करता है।[7] गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से ग्यारहवें और बारहवें भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है –  “राहु चन्द्र लग्न से ग्यारहवें भाव में जब गोचरवश आता है तो शुभ कार्यों में प्रवृत्ति होती है दान पुण्यादि में रुचि बढ़ती है; परन्तु धन तथा भाग्य की हानि होती है। पुत्रों को कष्ट पहुँचता है। मित्रों से हानि होती है। राहु चन्द्र लग्न से द्वादश भाव में जब गोचरवश आता है तो व्यय अधिक होता है। सुख का नाश होता है। घर छोड़ दूर जाना पड़ता है, बन्धन (जेल की यात्रा या अपहरण) की भी संभावना रहती है। धन एवं पशु-सुख की हानि होती है।“

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 50% शुभता और राहु एवं शनि के कारण 50% अशुभता रहेगी ।

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं –

·       कार्यक्षेत्र को लेकर सचेत रहें ।

·       मानभंग को लेकर सचेत रहें ।

·       व्ययाधिक्य को लेकर सावधान रहें ।

·       स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें ।

·       किसी से न उलझें सावधान रहें ।

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

v गुरु व शनि विशेष पूज्य हैं।

v हनुमानचालीसा का नित्यपाठ करें ।

v  प्रत्येक शनिवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ करें ।

v  रोगिजनों बूढ़े व अशक्तजनों की सेवा करने से सकल मनोरथ पूर्ण होंगे।

v सुनहला 6 से 8 रत्ती और लाजवर्त 12 रत्ती या उस से बड़ा धारण कर सकते हैं ।

v एकादशी का व्रत करें ।

v प्रतिदिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जप करें।


-        ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

(लब्धस्वर्णपदक) 

 



[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.23 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[5] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[6] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.2 पृष्ठ सं.621 मोतीलाल बनारसीदास

[7] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.24 पृष्ठ सं.637 मोतीलाल बनारसीदास

Wednesday, 26 July 2023

मेष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

    मेष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

यह वर्ष मेष राशि वाले जातकों के लिए मध्यमोत्तम अर्थात् मिश्रित फलदायक है। यदि शुभ फलों की ओर नजर डालें तो धन प्राप्ति के मार्ग में उपस्थित बाधायें दूर होंगी। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। धन लाभ तथा धनवृद्धि होगी लेकिन वित्तिय लेन देन में सचेत रहें। स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी कम होगी लेकिन मानसिक कष्ट संभव है, भ्रम की स्थिति बनेगी, माता के स्वास्थ्य में बाधा होगी। भूमि-भवन वाहन प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास सफल हो सकते हैं। विशेषरूप से वाहन का क्रय संभव है। आजीविका प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास तो सफल होंगे, परन्तु नौकरी पेशा वाले जातक के साथ षड़यंत्र व कपटपूर्ण आचरण होना संभव है, कार्यों में बाधा आयेगी। मेष राशि के सरकारी कर्मचारियों की व्यस्तता रहेगी। कुटुम्बीजनों का सहयोग प्राप्त होगा और शत्रुगण पराभव को प्राप्त होंगे।  अशुभ फलों में मेष राशि के छात्रवर्ग के प्रतियोगी परीक्षा परिणाम में विघ्न बाधायें उपस्थित होंगी। आलस्य व प्रमाद आपके विकास पथ पर बाधा उपस्थित करेंगे। विपरीत लिंगियों से सावधान रहें, अन्यथा सफलता में बाधा उपस्थित हो सकती है। मेष राशि के स्त्री वर्ग को विशेष कष्ट का सामना करना होगा। जीवनसाथी के चयन की दिशा में चल रहे प्रयासों में बाधायें आयेंगी। पारिवारिक तथा वैवाहिक जीवन में सकारात्मकता की कमी होगी। संतति सुख में बाधा उत्पन्न हो सकती है, लेकिन उनकी प्रगति होगी। भोगवादी प्रवृत्ति से बचें, अपने क्रोध संवेग पर पूर्ण नियन्त्रण रखें, अन्यथा प्रगति पथ से विमुख हो सकते हैं। न्यायालयीय कार्यों में कष्ट होगा। वर्ष 2023 के जनवरी, मार्च, जुलाई और नवम्बर मास विशेष कष्टदायी हैं। मेष राशि वालों पर इस वर्ष साढ़ेसाती या ढैया का कोई प्रभाव नहीं है। 



गोचर विचार में सबसे महत्वपूर्ण होता है शनि का विचार करना। इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि मेष से ग्यारहवीं राशि है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से ग्यारहवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

सौख्यान्येकादशस्थो बहुविधविभवप्राप्तिमुत्कृष्ट कीर्ति ।[1]

अर्थात् – जब शनि जन्मकालीन चन्द्र राशि से एकादशवीं राशि में भ्रमण करे तो शुभ फलकारक होता है। इस दौरान सब प्रकार के सुख, बहुत प्रकार के वैभव, उत्कृष्ट कीर्ति आदि शुभ फल होते हैं।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः मेष से बारहवीं और पहली है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से बारहवीं और पहली दोनों राशियों में बृहस्पति गोचर का अशुभफल ही बताया है।

जीवे जन्मनि देशनिर्गमनमप्यर्थच्युतिं शत्रुतां ।[3]

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि में ही गोचर करे तो देश या अपने स्थान से बाहर जाना, धन का अत्यन्त व्यय या नाश, शत्रुता आदि अनिष्ट फल होते हैं।

रिःफे दुःखं साध्वसं द्रव्यहेतोः ।[4]

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि से बारहवीं राशि में गोचर करे तो द्रव्य सम्बन्धी दुःख तथा भय, चिन्ता, उद्वेग आदि अशुभ फल होते हैं ।

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो मेष राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में अशुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी मेष राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[5] मेष राशि मेष से प्रथम ही है, गोचर विचार ग्रन्थ में जगन्नाथ भसीन जी ने यवानाचार्य का मत हिमगोः पूजमसादेर्धनम् का कट्पयादि विधि से अर्थ करते हुए राहु के प्रथम भाव में गोचर करना भी शुभफल प्रदाता बताया है। गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से प्रथम भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है – 

“राहु चन्द्र लग्न में यदि गोचरवश आ जावे तो मान में वृद्धि हो, धन सम्पत्ति बढ़े, पुत्रों के धन में वृद्धि हो। चूँकि राहु चन्द्र का शत्रु है, अतः मानसिक व्यथा भी हो”।[6] 

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 40% अशुभता और राहु एवं शनि के कारण 60% शुभता रहेगी।

 

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं -

  • ·       दुर्घटना को लेकर सावधान रहें।
  • ·       पत्नी-पुत्र एवं परिवार के स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहें।
  • ·       मानसिक अशान्ति को लेकर सावधान रहें।
  • ·       धन के व्यवहार में सावधानी बरतें।
  • ·       यात्रा को यथासम्भव टालने का प्रयास करें।
  • ·       शत्रुओं से सचेत रहें।

 

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

  • Ø  आवर्षान्त राहु, केतु तथा गुरु विशेष पूज्य हैं ।
  • Ø  नित्य विष्णुसहस्रनामस्तोत्र का पाठ अथवा श्रवण करें ।[7]
  • Ø  गुरुवार को फल, फूल तथा मिष्ठान का किसी धर्मस्थान में दान करें ।
  • Ø  भाईयों के सहयोग व सेवा एवं बड़े बुजुर्गों की सेवा से सकल मनोरथ पूर्ण होंगे।
  • Ø  माता-पिता एवं गुरुजनों का आशीर्वाद विशेष कल्याणदायक होगा।



- ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.23 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.18 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[5] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[6] गोचर विचार जगन्नाथ भसीन अ.1 पृष्ठ सं. 26, रंजन पब्लिकेशन्स

[7] नित्यकर्म पूजाप्रकाश, श्रीलालबिहारी मिश्र, स्तुति प्रकरण, पृष्ठ सं. 322, गीताप्रेस गोरखपुर


 

Friday, 12 May 2023

गुरुजी के महत्वपूर्ण संस्मरण

 गुरुजी के महत्वपूर्ण छायाचित्र















गुरुजी की जन्मकुण्डली

 गुरुजी की जन्मकुण्डली




जन्म दिनांक - 24 नवम्बर 1930

जन्मसमय - 08:18pm

जन्मस्थान - लोहरदगा

जन्मतिथि - पञ्चमी

जन्मवार - सोमवार

जन्मनक्षत्र - उत्तराषाढ़ा

जन्मयोग - गण्ड

जन्मकरण - बव 







Wednesday, 5 April 2023

वृष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 वृष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023


वृष राशि वाले जातकों के लिए यह वर्ष मध्यम फलदायक है। हालाँकि इस वर्ष वृष राशि वाले जातकों के जीवन में अर्थार्जन के मार्ग प्रशस्त होंगे साथ ही विद्यार्थियों के विद्यार्जन में उपस्थित विघ्न-बाधायें दूर होंगी। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। विवाह के इच्छुक लोगों के जीवन साथी के अन्वेषण की दिशा में चल रहे प्रयास सफल होंगे तथा संतान से उत्तम सुख की प्राप्ति होगी। व्यापार में बाधा होगी लेकिन आजीविका के स्रोत बढ़ेंगे, उच्चाधिकारियों से सम्पर्क होगा, व्यवसाय में लाभ एवं न्यायालीय कार्यों में सफलता मिलेगी। स्वजनो से विवाद संभव है परन्तु भूमि-भवन वाहन की प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास सफल होंगे। स्वास्थ्य में बाधा तथा उदर विकार संभव है। अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही आपको चिकित्सालय तक पहुँचा सकती है। माता-पिता का स्वास्थ्य कुप्रभावित हो सकता है, इस विषय में विशेष ध्यान दें। इस वर्ष कई धार्मिक व माङ्गलिक कार्य होंगे। वर्ष के उत्तरार्द्ध में आर्थिक प्रगति होगी तथा यश में वृद्धि होगी। आकस्मिक रुप से पारिवारिक सुख में बाधा पहुँचने से कष्ट होगा। सरकारी कर्मचारियों का स्थान परिवर्तन तथा पदोन्नति का योग है। सुरक्षा कर्मियों हेतु यह वर्ष कष्टकारी होगा। वर्ष के फरवरी, मार्च, जून, अक्टूबर मास कष्टदायी होंगे। इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि वृष से दसवीं राशि है। 

फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से दसवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

दुर्व्यापारप्रवित्तिं कलयति दशमे मानभङ्गं रुजं वा । 

अर्थात् – जब  शनि जन्मराशि से दसवीं राशि में गोचर करता है तब जातक को ऐसे व्यापार में प्रवृत्त करता है जो उसके अनुकूल नहीं है और ऐसे व्यापार में प्रवृत्त होकर जातक कई तरह के नुकसान उठाता है अथवा कुछ परिस्थिति ऐसी उत्पन्न हो जाती है कि व्यक्ति गलत काम कर बैठता है और अपमान तथा नुकसान प्राप्त करता है। साथ ही   दशमराशिगत शनि मानभंग कराता है और बहुत कष्टकारी रोग भी देता है। 

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।  यह दोनों राशियाँ क्रमशः वृष से ग्यारहवीं और बारहवीं है। 

मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से बारहवीं राशि में बृहस्पति गोचर का अशुभफल तथा ग्यारहवीं राशि में बृहस्पति गोचर का शुभफल बताया है।

लाभे पुत्रस्थानमानादिलाभो ।   

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि से ग्यारहवीं राशि में गोचर करे तो पुत्र लाभ होता है, स्थानलाभ (नयी जगह जाना, नया पद मिलना आदि) होता है तथा सम्मान की वृद्धि होती है। 

रिःफे दुःखं साध्वसं द्रव्यहेतोः । 

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि से बारहवीं राशि में गोचर करे तो द्रव्य सम्बन्धी दुःख तथा भय, चिन्ता, उद्वेग आदि अशुभ फल होते हैं ।

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो वृष राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में शुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी वृष राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।  यह दोनों राशियाँ क्रमशः वृष से बारहवीं और ग्यारहवीं है। 

मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से बारहवीं राशि में राहु गोचर का अशुभफल तथा ग्यारहवीं राशि में राहु गोचर का शुभफल बताया है।  जन्म राशि से ग्यारहवीं राशि में स्थित राहु सौभाग्य तथा जन्मराशि से बारहवीं राशि में स्थित राहु व्यय प्रदान करता है।  

गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से ग्यारहवें और बारहवें भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है –  “राहु चन्द्र लग्न से ग्यारहवें भाव में जब गोचरवश आता है तो शुभ कार्यों में प्रवृत्ति होती है दान पुण्यादि में रुचि बढ़ती है; परन्तु धन तथा भाग्य की हानि होती है। पुत्रों को कष्ट पहुँचता है। मित्रों से हानि होती है। राहु चन्द्र लग्न से द्वादश भाव में जब गोचरवश आता है तो व्यय अधिक होता है। सुख का नाश होता है। घर छोड़ दूर जाना पड़ता है, बन्धन (जेल की यात्रा या अपहरण) की भी संभावना रहती है। धन एवं पशु-सुख की हानि होती है।“ 

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 50% शुभता और राहु एवं शनि के कारण 50% अशुभता रहेगी । 




निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं –

• कार्यक्षेत्र को लेकर सचेत रहें ।

• मानभंग को लेकर सचेत रहें ।

• व्ययाधिक्य को लेकर सावधान रहें ।

• स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें ।

• किसी से न उलझें सावधान रहें ।


अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

  1. गुरु व शनि विशेष पूज्य हैं। 
  2. हनुमानचालीसा का नित्यपाठ करें ।
  3. प्रत्येक शनिवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ करें ।
  4. रोगिजनों बूढ़े व अशक्तजनों की सेवा करने से सकल मनोरथ पूर्ण होंगे।
  5. सुनहला 6 से 8 रत्ती और लाजवर्त 12 रत्ती या उस से बड़ा धारण कर सकते हैं ।
  6. एकादशी का व्रत करें ।
  7. प्रतिदिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जप करें।

- ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य 

Tuesday, 14 March 2023

मेष राशि का वार्षिक राशिफल वर्ष 2023

 

 

मेष राशि का वार्षिक राशिफल वर्ष 2023

 

यह वर्ष मेष राशि वाले जातकों के लिए मध्यमोत्तम अर्थात् मिश्रित फलदायक है। यदि शुभ फलों की ओर नजर डालें तो धन प्राप्ति के मार्ग में उपस्थित बाधायें दूर होंगी। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। धन लाभ तथा धनवृद्धि होगी लेकिन वित्तिय लेन देन में सचेत रहें। स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी कम होगी लेकिन मानसिक कष्ट संभव है, भ्रम की स्थिति बनेगी, माता के स्वास्थ्य में बाधा होगी। भूमि-भवन वाहन प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास सफल हो सकते हैं। विशेषरूप से वाहन का क्रय संभव है। आजीविका प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास तो सफल होंगे, परन्तु नौकरी पेशा वाले जातक के साथ षड़यंत्र व कपटपूर्ण आचरण होना संभव है, कार्यों में बाधा आयेगी। मेष राशि के सरकारी कर्मचारियों की व्यस्तता रहेगी। कुटुम्बीजनों का सहयोग प्राप्त होगा और शत्रुगण पराभव को प्राप्त होंगे।  अशुभ फलों में मेष राशि के छात्रवर्ग के प्रतियोगी परीक्षा परिणाम में विघ्न बाधायें उपस्थित होंगी। आलस्य व प्रमाद आपके विकास पथ पर बाधा उपस्थित करेंगे। विपरीत लिंगियों से सावधान रहें, अन्यथा सफलता में बाधा उपस्थित हो सकती है। मेष राशि के स्त्री वर्ग को विशेष कष्ट का सामना करना होगा। जीवनसाथी के चयन की दिशा में चल रहे प्रयासों में बाधायें आयेंगी। पारिवारिक तथा वैवाहिक जीवन में सकारात्मकता की कमी होगी। संतति सुख में बाधा उत्पन्न हो सकती है, लेकिन उनकी प्रगति होगी। भोगवादी प्रवृत्ति से बचें, अपने क्रोध संवेग पर पूर्ण नियन्त्रण रखें, अन्यथा प्रगति पथ से विमुख हो सकते हैं। न्यायालयीय कार्यों में कष्ट होगा। वर्ष 2023 के जनवरी, मार्च, जुलाई और नवम्बर मास विशेष कष्टदायी हैं। मेष राशि वालों पर इस वर्ष साढ़ेसाती या ढैया का कोई प्रभाव नहीं है। गोचर विचार में सबसे महत्वपूर्ण होता है शनि का विचार करना। इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि मेष से ग्यारहवीं राशि है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से ग्यारहवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

सौख्यान्येकादशस्थो बहुविधविभवप्राप्तिमुत्कृष्ट कीर्ति ।

अर्थात् – जब शनि जन्मकालीन चन्द्र राशि से एकादशवीं राशि में भ्रमण करे तो शुभ फलकारक होता है। इस दौरान सब प्रकार के सुख, बहुत प्रकार के वैभव, उत्कृष्ट कीर्ति आदि शुभ फल होते हैं।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे। यह दोनों राशियाँ क्रमशः मेष से बारहवीं और पहली है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से बारहवीं और पहली दोनों राशियों में बृहस्पति गोचर का अशुभफल ही बताया है।

जीवे जन्मनि देशनिर्गमनमप्यर्थच्युतिं शत्रुतां ।

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि में ही गोचर करे तो देश या अपने स्थान से बाहर जाना, धन का अत्यन्त व्यय या नाश, शत्रुता आदि अनिष्ट फल होते हैं।

रिःफे दुःखं साध्वसं द्रव्यहेतोः ।

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि से बारहवीं राशि में गोचर करे तो द्रव्य सम्बन्धी दुःख तथा भय, चिन्ता, उद्वेग आदि अशुभ फल होते हैं ।

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो मीन राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में अशुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी मेष राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे। मेष राशि मेष से प्रथम ही है, गोचर विचार ग्रन्थ में जगन्नाथ भसीन जी ने यवानाचार्य का मत हिमगोः पूजमसादेर्धनम् का कट्पयादि विधि से अर्थ करते हुए राहु के प्रथम भाव में गोचर करना भी शुभफल प्रदाता बताया है। गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से प्रथम भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है – “राहु चन्द्र लग्न में यदि गोचरवश आ जावे तो मान में वृद्धि हो, धन सम्पत्ति बढ़े, पुत्रों के धन में वृद्धि हो। चूँकि राहु चन्द्र का शत्रु है, अतः मानसिक व्यथा भी हो”। इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 40% अशुभता और राहु एवं शनि के कारण 60% शुभता रहेगी।





 

 

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं -

·      दुर्घटना को लेकर सावधान रहें।

·       पत्नी-पुत्र एवं परिवार के स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहें।

·       मानसिक अशान्ति को लेकर सावधान रहें।

·       धन के व्यवहार में सावधानी बरतें।

·       यात्रा को यथासम्भव टालने का प्रयास करें।

·       शत्रुओं से सचेत रहें।

 

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

Ø  आवर्षान्त राहु, केतु तथा गुरु विशेष पूज्य हैं ।

Ø  नित्य विष्णुसहस्रनामस्तोत्र का पाठ अथवा श्रवण करें ।

Ø  गुरुवार को फल, फूल तथा मिष्ठान का किसी धर्मस्थान में दान करें ।

Ø  भाईयों के सहयोग व सेवा एवं बड़े बुजुर्गों की सेवा से सकल मनोरथ पूर्ण होंगे।

Ø  माता-पिता एवं गुरुजनों का आशीर्वाद विशेष कल्याणदायक होगा। 


- ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य