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Thursday, 27 July 2023

सिंह राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 

सिंह राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

-        ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

(लब्धस्वर्णपदक)

यह वर्ष मध्यम फलदायक है। विद्यार्थियों को अपने विद्यार्जन के क्षेत्र में विशेष विघ्न बाधायें उपस्थित होगी। आजीविका प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास सफल होंगे लेकिन अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में संघर्ष होगा। सहोदर भाई-बहनों के सहयोग एवं सद्व्यवहार से आपको सुख प्राप्त होगा। कार्यस्थल के सहयोगियों से मतभेद सम्भव है। जीवनसाथी के अन्वेषण में चल रहे प्रयास सफल होंगे। विवाहित लोगों के दाम्पत्य जीवन में सुख सहयोग रहेगा। भूमि-भवन वाहन प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयासों में अवरोध उपस्थित होगा। यह वर्ष आर्थिक उन्नति वाला रहेगा परन्तु वित्तिय व्यय पर कड़ा प्रबंधन आवश्यक है, आकस्मिक व्यय होगा। ध्यान रहे शेयर बाजार, द्यूतक्रीड़ा एवं सट्टेबाजी आदि हेतु आपके लिए यह वर्ष उचित नही है, अतिशीघ्रता में लिया गया निर्णय हानिकारक होगा। नौकरी पेशा हेतु यह वर्ष उत्तम रहेगा। धर्मार्जन तथा भाग्योदय में अनुकूल सफलता की प्राप्ति होगी तथा सामाजिक कार्य में अभिरुचि होगी। माता-पिता के स्वास्थ्य में बाधा होगी। मुख्यतः जीवन साथी तथा माताजी का स्वास्थ्य एवं व्यवहार आपको व्यथित कर सकता है। आलस्य व प्रमाद का सर्वथा परित्याग कर विकास पथ पर अग्रसर होवें। अपने स्वास्थ्य का पूर्ण ध्यान रखें। आपका स्वास्थ्य तो उत्तम रहेगा परन्तु दुर्घटना तथा चोट-चपेट की संभावना है। ध्यान रहे यदि आपको पहले से कोई अस्थिरोग, जठररोग अथवा नेत्र सम्बन्धित रोग है तो उसके विकारों में वृद्धि से कष्ट होगा। इस वर्ष किसी स्त्री का वियोग संभव है। आपके लिए वर्ष 2023 के मार्च, जुलाई, सितम्बर और नवम्बर महीने कष्टकारी सिद्ध होंगे। सिंह राशि वालों पर इस वर्ष साढ़ेसाती या ढैया का कोई प्रभाव नहीं है।





गोचर विचार में सबसे महत्वपूर्ण होता है शनि का विचार करना। इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि सिंह से सातवीं राशि है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से सातवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

स्त्रीरोगाध्वावभीतिं[1] अर्थात् - स्त्री के रोग से या स्त्रीप्रेम के कारण भय होता है।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः सिंह से आठवीं और नवीं हैं। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से आठवीं राशि में बृहस्पति गोचर का अशुभफल और नवीं राशि में बृहस्पति गोचर का शुभफल बताया है।

मार्गक्लेशमरिष्टमष्टमगते नष्टं धनैः कष्टताम् ॥[3]

अर्थात् - बृहस्पति जन्मराशि से आठवीं राशि में गोचर करे तो मार्गक्लेश, व्यर्थ यात्रा से परिश्रम, धन नाश, विविध प्रकार के कष्ट आदि अशुभफल प्राप्त होते हैं।

भाग्ये जीवे सर्वसौभाग्यसिद्धिः ॥[4]

अर्थात् - बृहस्पति जन्मराशि से नवीं राशि में गोचर करे तो सर्वसौभाग्य सिद्धि, भाग्योदय, कार्य में सफलता आदि शुभफल प्राप्त होते हैं।

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो मेष राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में शुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी सिंह राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[5] मेष राशि सिंह से नवम है, गोचर विचार ग्रन्थ में जगन्नाथ भसीन जी ने यवानाचार्य का मत हिमगोः पूजमसादेर्धनम् का कट्पयादि विधि से अर्थ करते हुए जन्मराशि से नवम भाव में गोचर राहु को शुभफल प्रदाता बताया है। गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से नवम भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है – "राहु चन्द्र लग्न से नवम भाव में जब गोचरवश आता है तो अकस्मात् आशातीत लाभ होता है जो प्रायः चिरस्थायी होता है। राज्य की ओर से कृपा रहती है। मित्रों से सहायता प्राप्त होती है । परन्तु चन्द्र लग्न पर राहु की दृष्टि के कारण मानसिक व्यथा भी होती है।"[6]  मीन राशि सिंह से अष्टम है, गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से अष्टम भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है – "राहु चन्द्र लग्न से आठवें भाव में जब गोचरवश आता है तो अकस्मात् धन की वृद्धि होती है परन्तु विदेश यात्रा और भयंकर रोगों की भी संभावना रहती है।"

प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 60% शुभता और राहु एवं शनि के कारण 40% शुभता रहेगी। मुख्यरूप से गुरु एवं राहु के कारण मई से नवम्बर तक का समय बहुत शुभ है।

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं -

  • ·       पत्नी के स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहें।
  • ·       किसी स्त्री के प्रेम के चक्कर न पड़ें वो मात्र के झांसा है।
  • ·       रोगों को लेकर बहुत सचेत रहें, बुरी तरह स्वास्थ्य हानि हो सकती है।
  • ·       शेयर बाजार, द्यूतक्रीड़ा एवं सट्टेबाजी आदि हेतु आपके लिए यह वर्ष उचित नही है, अतिशीघ्रता में लिया गया निर्णय हानिकारक होगा।
  • ·       कार्यस्थल के सहयोगियों से मतभेद सम्भव है।
  • ·       वित्तिय व्यय पर कड़ा प्रबंधन आवश्यक है, आकस्मिक व्यय होगा।
  • ·       यात्रा के दौरान सावधानी बरतें कुछ अनहोनी संभावित है ।

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

  • Ø  प्रतिकूलताओं की निवृत्ति के लिए पीपल का वृक्ष लगावें।
  • Ø  गुरुजनों, पूज्यजनों तथा बड़े भाई की नित्य सेवा करें एवं उनसे आशीर्वाद ग्रहण करें।
  • Ø  विष्णुसहस्रनामस्तोत्र का नित्य पाठ करने से सकल बाधायें दूर होंगी।
  • Ø  आवर्षान्त राहु तथा शनि विशेष पूज्य हैं ।
  • Ø  हनुमान जी की नित्य आराधना उनके स्तोत्रों का पाठ बहुत लाभप्रद सिद्ध होगा ।
  • Ø  प्रत्येक शनिवार सुन्दरकाण्ड का पाठ अवश्य करें ।
  • Ø  माता-पिता एवं गुरुजनों का आशीर्वाद विशेष कल्याणदायक होगा।

 

 



[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.22 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.19, पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20, पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[5] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[6] गोचर विचार जगन्नाथ भसीन अ.1 पृष्ठ सं. 27, रंजन पब्लिकेशन्स

कर्क राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 

कर्क राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

-        ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

(लब्धस्वर्णपदक)

यह वर्ष आपके लिए मध्यम फलदायक है। विवाहार्थियों को मनोनुकूल फल की प्राप्ति में विघ्न बाधायें उपस्थित होंगी। सहोदर भाई बहनों का स्वास्थ्य तथा व्यवहार कुप्रभावित होगा। भूमि भवन वाहन सुख प्राप्ति के सामान्य योग हैं। प्रतियोगिता परीक्षा में लगे परीक्षार्थियों को विशेष सफलता की प्राप्ति होगी। सुसङ्गति के प्रभाव से विशेष सफलता प्राप्त होगी। ऋण- रिपु-रोगों से मुक्ति मिलेगी। आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। अपव्यय से चित्त अशान्त रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी कष्ट होगा, अनिद्रा तथा दुश्चिंतायें आपके स्वास्थ्य को प्रतिकूल कर सकती हैं। कुटुम्बीजन असंतुष्ट रहेंगे, स्वजनों तथा मित्रों से वियोग तथा कुटुम्बीय कलह होगा। अपने वाग् व्यवहार तथा खाद्य पेय पर विशेष ध्यान देन होगा। शनि की ढैया के कारण शत्रु प्रबल होगें तथा कार्यों में अवरोध होगा। सन्तान के प्रति चिन्ता होगी। यात्रा में कष्ट एवं हानि का योग है। राजकीय दंड़ का भय व कानूनी कार्यों में असफलता प्राप्त होगी। वित्त संबंधी लेन देन के कार्यों में विवाद तथा मानसिक कष्ट होगा। भूमि सम्पति का विवाद तथा मानसिक उद्वेग बढ़ेगा। नौकरी में स्थानान्तरण संभव है। गृहिणियों पर मानसिक दबाव होगा। वर्ष 2023 के अप्रैल, अगस्त, अक्टूबर, दिसम्बर मास नेष्ट हैं।





गोचर विचार में सबसे महत्वपूर्ण होता है शनि का विचार करना। इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि कर्क से आठवीं राशि है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से आठवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

स्वसुतपशुसुहृद्वित्तनाशमायाति जन्मादेरष्टमान्तं दिशति पदवशेनार्कसूनुः क्रमेण ॥[1]

अर्थात् - जन्मकालीन चन्द्र राशि से शनि गोचरवश अष्टम भाव में हो तो पूर्ण अशुभ फल देता है। संतान नाश या संतान कष्ट होता है। पशु, मित्र, धन आदि के कारण घोर पीड़ा होती है। इष्ट मित्र से वियोग होता है, पशुधन की विशेष हानि होती है। मनुष्य को स्वास्थ सम्बन्धी भी चिन्ता उपस्थित होती रहती है। किसी पीड़ाकारक रोग के कारण विशेष शरीर कष्ट होता है।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः कर्क से नवमी और दशमी है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से नवमी राशि में बृहस्पति गोचर का शुभफल और दशमी राशि में बृहस्पति गोचर का अशुभफल बताया है।

भाग्ये जीवे सर्वसौभाग्यसिद्धिः ॥[3]

अर्थात् - यदि बृहस्पति जन्मराशि से नवम में गोचर करे तो सर्वसौभाग्य सिद्धि, भाग्योदय, कार्य में सफलता आदि शुभ फल प्राप्त होते हैं।

कर्मण्यर्थस्थानपुत्रादिपीडा ॥[4]

अर्थात् - यदि बृहस्पति जन्मराशि से दशम में गोचर करे तो कर्मस्थान में धन या पद का कष्ट जैसे - नौकरी या ओहदे में कमी या सम्मान में कोई हानि आदि फल होते हैं। साथ ही संतान पीड़ा आदि अशुभ फल मिलते हैं।

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो कर्क राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में मिश्रित फलों की पुष्टता हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी कर्क राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[5] मेष राशि कर्क से चतुर्थ तथा मीन राशि कर्क से पञ्चम है, गोचर विचार ग्रन्थ में जगन्नाथ भसीन जी ने यवानाचार्य का मत हिमगोः पूजमसादेर्धनम् का कट्पयादि विधि से अर्थ करते हुए राहु के चतुर्थ भाव में गोचर को अशुभफल प्रदाता तथा पञ्चम भाव में गोचर को शुभफल प्रदाता बताया है। गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से चतुर्थ भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है – "राहु चन्द्र लग्न से चतुर्थ भाव में जब गोचरवश आता है तो सुख का नाश करता है। राज्य के विरुद्ध विद्रोह की भावना होती है। पैतृक स्थान से दूर ले जाता है। सम्बन्धियों से कोई सहायता नहीं मिलती। सुख में कमी करता है।"[6] साथ ही उन्होंने राहु का चन्द्रलग्न से पञ्चम भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है – "राहु चन्द्र लग्न से पंचम भाव में जब गोचरवश आता है तो धन ऐश्वर्य में अचानक वृद्धि करता है। सट्टे आदि से लाभ करवाता है। भाग्य तथा आय में भी वृद्धि करता है, परन्तु इसकी चन्द्र पर नवम दृष्टि के कारण मानसिक व्यथा भी हो।"[7]

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु, शनि एवं गुरु के कारण 70% अशुभता और राहु एवं गुरु के कारण 30% शुभता रहेगी।

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं -

  • ·       आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
  • ·       अनिद्रा तथा दुश्चिंतायें आपके स्वास्थ्य को प्रतिकूल कर सकती हैं।
  • ·       सन्तान के प्रति चिन्ता होगी।
  • ·       भूमि सम्पति का विवाद तथा मानसिक उद्वेग बढ़ेगा।
  • ·       राजकीय दंड़ का भय व कानूनी कार्यों में असफलता प्राप्त होगी।
  • ·       यात्रा में कष्ट एवं हानि का योग है।
  • ·       धैर्य के साथ इस बुरे समय के व्यतीत होने की प्रतीक्षा करें आगे जीवन में कई शुभ फलों की प्राप्ति होनी है।

 

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

  • Ø  शनि, गुरु तथा केतु विशेष पूज्य हैं अतः इन ग्रहों के मन्त्रजप कराएँ।
  • Ø  प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर शनिदशनाम का पाठ करें।[8]
  • Ø  प्रतिदिन स्नान के बाद दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें।[9]
  • Ø  शनिवार को शनि दीपदान करें।[10]
  • Ø  शनिवार को अश्वत्थस्तोत्र[11] का पाठ करते हुए पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करें।
  • Ø  प्रत्येक शनिवार सुन्दरकाण्ड का पाठ अवश्य करें ।
  • Ø  नियमित विष्णुसहस्रनामस्तोत्र का नित्य पाठ करने से सकल मनोकामना पूर्ण होगी।
  • Ø  वृद्धजनों की सेवा करें ।
  •  

 



[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.22 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[5] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[6] गोचर विचार जगन्नाथ भसीन अ.1 पृष्ठ सं. 27, रंजन पब्लिकेशन्स

[7] गोचर विचार जगन्नाथ भसीन अ.1 पृष्ठ सं. 27, रंजन पब्लिकेशन्स

[8] कोणस्थ पिङ्गलो बभ्रुः कृष्णः रौद्रान्तको यमः, शौरी शनिश्चरो मन्दः पिप्पलाश्रयः संस्तुतः।

   एतानि  दश  नामानि  प्रातरुत्थाय यो पठेत् शनिश्चरो कृता पीड़ा न कदाचित् भविष्यति।।

[9] https://www.bhaktibharat.com/mantra/dashratha-shani-sotra

[10]https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=579770947498176&id=100063958274060&mibextid=Nif5oz

[11] नित्यकर्म पूजाप्रकाश, श्रीलालबिहारी मिश्र, स्तुति प्रकरण, पृष्ठ सं. 336, गीताप्रेस गोरखपुर

मिथुन राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 

मिथुन राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

-        ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

(लब्धस्वर्णपदक)

मिथुन राशि वाले जातकों के लिए यह वर्ष बहुत अच्छा नहीं है। इस वर्ष सामान्य ही फल मिलेंगे। स्वास्थ्य में बाधा एवं अपव्यय से मानसिक तनाव होगा। नेत्रविकार से कष्ट संभव है। भूमि, सम्पत्ति, वाहन के क्रय-विक्रय से प्रगति होगी। कार्य क्षेत्र में अथक परिश्रम करना होगा। सहयोगियों से सामंजस्यता का अभाव रहेगा। स्त्री से वियोग व मतभेद संभव है। दाम्प्तय जीवन में सुख-शांति रहेगी। बच्चों की शिक्षा के सम्बन्ध में अथक परिश्रम करना होगा। राजनीतिक व्यत्तियों में भ्रम की स्थिति रहेगी तथा विपक्ष से हानि संभव है। वित्तसंस्थान के संचालको एवं विज्ञापनकर्मीयो को मंदी का सामना करना पड़ेगा। माता पिता की तीर्थ यात्रा का योग है। शत्रु प्रबल होगें । विद्यार्थीयो को कष्ट संभव है। वर्ष के जनवरी, मई, सितंबर और नवंबर मास कष्टदायी हैं। मिथुन राशि पर ग्रहों के प्रभाव के आधार पर विचार करें तो 1 जनवरी से 6 फरवरी तक वक्री बुध की स्वगृही दृष्टि रहने से पुरुषार्थ एवं उद्यम में वृद्धि, संघर्ष के बावजूद आय के साधन बनते रहेंगे। परन्तु 14 जनवरी तक सूर्य की दृष्टि तथा  17 जनवरी तक शनि की ढैय्या का प्रभाव रहने से क्रोध एवं उत्तेजना से बनते हुए कार्य बिगड़ सकते हैं। 7 फरवरी से 27 फरवरी तक बुध अष्टमस्थ तथा 1 मार्च से 30 मार्च तक बुध अस्त रहने से स्वास्थ्य कष्ट, आय कम तथा खर्च अधिक होंगे। 16 मार्च से 30 मार्च तक बुध नीच (मीन) राशिस्थ होने से स्वास्थ्य हानि, अत्यधिक खर्च, तनाव एवं बनते कामों में अड़चनें पैदा करेगा। 1 अक्तूबर से 18 अक्तूबर तक बुध के जन्मराशि से चतुर्थ भाव में उच्चराशिस्थ होने से अचानक धन प्राप्ति के योग हैं। नवंबर में बुध के छठे स्थान में होने से सेहत में खराबी तथा चोटादि का भय होगा। 



इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि मिथुन से नौवीं राशि है। शनि चन्द्र लग्न से नवें भाव में जब गोचरवश आता है तो दुःख, रोग और शत्रुओं की वृद्धि होती है। धर्म के कार्यों से मनुष्य पीछे हट जाता है अथवा धर्म परिवर्तन कर बैठता है । प्रादेशिक अथवा तीर्थ यात्राएं होती हैं, परन्तु लाभप्रद नहीं होतीं । भ्रातृ वर्ग व मित्रों से अनबन व कष्ट पाता है। आय में कमी आ जाती है। भृत्य वर्ग से भी परेशानी रहती है। बन्धन एवं आरोपों का भय रहता है। शनि के मिथुन राशि से नवमस्थ होने से कार्य व्यवसाय एवं भाग्योन्नति में अड़चनें आएँगी, स्वास्थ्य सम्बन्धी कष्ट होंगे तथा परिस्थितियाँ विपरीत रहेंगी। पारिवारिक मतभेद रहेंगे। इस राशि पर शनि का पाया सुवर्ण होने से भी निकट बन्धुओं से मतभेद पैदा होंगे। जुलाई के बाद से कुछ रुके हुए कार्यों में सफलता मिलेगी। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से नौवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

दारिद्र्यं धर्मविघ्नं पितृसमविलयं नित्यदुःखं शुभस्थे[1]

अर्थात् – जब शनि गोचरवश चन्द्रराशि से नौवीं राशि में आता है तो दरिद्रता कारक होता है। धर्म कार्य में विघ्न उपस्थित होते हैं। पिता के सामान आदरणीय (गुरु, चाचा, मामा आदि) किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है। नित्य दुःख प्राप्त होता रहता है।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः मिथुन से दसवीं और ग्यारहवीं है। चन्द्र लग्न से दशम भाव में बृहस्पति  जब गोचरवश आता है तो दीनता होती है, मानहानि तक की सम्भावना रहती है तथा अन्न धन की भी हानि होती है। इसलिए अप्रैल 2023 तक का गुरु गोचर शुभ नहीं है। 22 अप्रैल से गुरु मेष राशि में रहेंगे, इसका श्रेष्ठ फल मिलेगा। बृहस्पति चन्द्र लग्न से ग्यारहवें भाव में जब गोचरवश आता है तो धन और प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है। शत्रु पराजित होते हैं और समस्त कार्यों में सफलता मिलती है। विवाह तथा पुत्र जन्म का अवसर प्राप्त होता है। नौकरी में पदोन्नति और व्यापार में अवश्य ही वृद्धि होती है। उत्तम सुख की प्राप्ति होती है। वैभव विलास की वस्तुएं प्राप्त होती हैं। पुत्रों से तथा राज्याधिकारियों से सुख मिलता है। शुभ कार्यों में रुचि होती है तथा रति सुख में वृद्धि होती है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से दसवीं राशि में बृहस्पति गोचर का अशुभफल तथा ग्यारहवीं राशि में बृहस्पति गोचर का शुभफल बताया है।

कर्मण्यर्थस्थानपुत्रादिपीडा [3]

अर्थात् - बृहस्पति यदि जन्मराशि से दसवीं राशि में गोचर करे तो कार्यक्षेत्र में धन संबंधी या स्थान संबंधी (तबादला, पदहानि, सम्मानहानि) परेशानियाँ होती हैं। साथ ही संतान को या संतान से कष्ट प्राप्त होता है।

लाभे पुत्रस्थानमानादिलाभो ।[4]

अर्थात् - यदि बृहस्पति जन्मराशि से लाभ भाव में गोचर करे तो पुत्रलाभ, पद या स्थान का लाभ, सम्मान या पुरस्कार की प्राप्ति आदि लाभ मिलते हैं।

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो मिथुन राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में शुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी मिथुन राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[5] यह दोनों राशियाँ क्रमशः मिथुन से ग्यारहवीं और दसवीं है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से ग्यारहवीं तथा दसवीं दोनों ही राशियों में राहु गोचर का शुभफल बताया है।[6] जन्म राशि से ग्यारहवीं राशि में स्थित राहु सौभाग्य तथा जन्मराशि से दसवीं राशि में स्थित राहु लाभ प्रदान करता है।[7] गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से ग्यारहवें और दसवें भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है –  राहु चन्द्र लग्न से ग्यारहवें भाव में जब गोचरवश आता है तो शुभ कार्यों में प्रवृत्ति होती है। दान-पुण्यादि में रुचि बढ़ती है; परन्तु धन तथा भाग्य की हानि होती है। पुत्रों को कष्ट पहुँचता है। मित्रों से हानि होती है। राहु चन्द्र लग्न से दशम भाव में जब गोचरवश जाता है तो गंगादि तीर्थों में स्नान का अवसर आता है। दान-पुण्य करने को जी चाहता है। मान में अकस्मात् वृद्धि होती है। कार्य सफल होते हैं। परन्तु शत्रु भी उत्पन्न हो जाते हैं।

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 60% शुभता और शनि के कारण 40% अशुभता रहेगी ।

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं –

  • ·       मानसिक अशान्ति रहेगी ।
  • ·       धर्म से मन भटकेगा दृढ़तापूर्वक मन को धर्म में जोड़े रखें ।
  • ·       किसी ज्येष्ठ या आदरणीय रिश्तेदार की मृत्यु संभावित है ।
  • ·       दुःख, रोग एवं शत्रुओं की वृद्धि होगी ।
  • ·       रोजमर्रा के कार्यों में भी कुछ-कुछ विघ्न उपस्थित होंगे ।

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

  • Ø  गुरु व शनि विशेष पूज्य हैं।
  • Ø  हनुमानचालीसा तथा सुन्दरकाण्ड रामायण पाठ से विघ्न दूर होंगें ।  
  • Ø  रोगियों, बूढ़े तथा अशक्तजनों की सेवा करने से सकल मनोरथ पूर्ण होंगे।
  • Ø  नित्य विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।
  • Ø  सुनहला रत्न 6 कैरट या उस से अधिक वजन का धारण करें।
  • Øएकादशी का व्रत करें ।



[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.23 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[5] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[6] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.2 पृष्ठ सं.621 मोतीलाल बनारसीदास

[7] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.24 पृष्ठ सं.637 मोतीलाल बनारसीदास