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Thursday, 27 July 2023

मिथुन राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 

मिथुन राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

-        ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

(लब्धस्वर्णपदक)

मिथुन राशि वाले जातकों के लिए यह वर्ष बहुत अच्छा नहीं है। इस वर्ष सामान्य ही फल मिलेंगे। स्वास्थ्य में बाधा एवं अपव्यय से मानसिक तनाव होगा। नेत्रविकार से कष्ट संभव है। भूमि, सम्पत्ति, वाहन के क्रय-विक्रय से प्रगति होगी। कार्य क्षेत्र में अथक परिश्रम करना होगा। सहयोगियों से सामंजस्यता का अभाव रहेगा। स्त्री से वियोग व मतभेद संभव है। दाम्प्तय जीवन में सुख-शांति रहेगी। बच्चों की शिक्षा के सम्बन्ध में अथक परिश्रम करना होगा। राजनीतिक व्यत्तियों में भ्रम की स्थिति रहेगी तथा विपक्ष से हानि संभव है। वित्तसंस्थान के संचालको एवं विज्ञापनकर्मीयो को मंदी का सामना करना पड़ेगा। माता पिता की तीर्थ यात्रा का योग है। शत्रु प्रबल होगें । विद्यार्थीयो को कष्ट संभव है। वर्ष के जनवरी, मई, सितंबर और नवंबर मास कष्टदायी हैं। मिथुन राशि पर ग्रहों के प्रभाव के आधार पर विचार करें तो 1 जनवरी से 6 फरवरी तक वक्री बुध की स्वगृही दृष्टि रहने से पुरुषार्थ एवं उद्यम में वृद्धि, संघर्ष के बावजूद आय के साधन बनते रहेंगे। परन्तु 14 जनवरी तक सूर्य की दृष्टि तथा  17 जनवरी तक शनि की ढैय्या का प्रभाव रहने से क्रोध एवं उत्तेजना से बनते हुए कार्य बिगड़ सकते हैं। 7 फरवरी से 27 फरवरी तक बुध अष्टमस्थ तथा 1 मार्च से 30 मार्च तक बुध अस्त रहने से स्वास्थ्य कष्ट, आय कम तथा खर्च अधिक होंगे। 16 मार्च से 30 मार्च तक बुध नीच (मीन) राशिस्थ होने से स्वास्थ्य हानि, अत्यधिक खर्च, तनाव एवं बनते कामों में अड़चनें पैदा करेगा। 1 अक्तूबर से 18 अक्तूबर तक बुध के जन्मराशि से चतुर्थ भाव में उच्चराशिस्थ होने से अचानक धन प्राप्ति के योग हैं। नवंबर में बुध के छठे स्थान में होने से सेहत में खराबी तथा चोटादि का भय होगा। 



इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि मिथुन से नौवीं राशि है। शनि चन्द्र लग्न से नवें भाव में जब गोचरवश आता है तो दुःख, रोग और शत्रुओं की वृद्धि होती है। धर्म के कार्यों से मनुष्य पीछे हट जाता है अथवा धर्म परिवर्तन कर बैठता है । प्रादेशिक अथवा तीर्थ यात्राएं होती हैं, परन्तु लाभप्रद नहीं होतीं । भ्रातृ वर्ग व मित्रों से अनबन व कष्ट पाता है। आय में कमी आ जाती है। भृत्य वर्ग से भी परेशानी रहती है। बन्धन एवं आरोपों का भय रहता है। शनि के मिथुन राशि से नवमस्थ होने से कार्य व्यवसाय एवं भाग्योन्नति में अड़चनें आएँगी, स्वास्थ्य सम्बन्धी कष्ट होंगे तथा परिस्थितियाँ विपरीत रहेंगी। पारिवारिक मतभेद रहेंगे। इस राशि पर शनि का पाया सुवर्ण होने से भी निकट बन्धुओं से मतभेद पैदा होंगे। जुलाई के बाद से कुछ रुके हुए कार्यों में सफलता मिलेगी। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से नौवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

दारिद्र्यं धर्मविघ्नं पितृसमविलयं नित्यदुःखं शुभस्थे[1]

अर्थात् – जब शनि गोचरवश चन्द्रराशि से नौवीं राशि में आता है तो दरिद्रता कारक होता है धर्म कार्य में विघ्न उपस्थित होते हैं। पिता के सामान आदरणीय (गुरु, चाचा, मामा आदि) किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है। नित्य दुःख प्राप्त होता रहता है।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः मिथुन से दसवीं और ग्यारहवीं है। चन्द्र लग्न से दशम भाव में बृहस्पति  जब गोचरवश आता है तो दीनता होती है, मानहानि तक की सम्भावना रहती है तथा अन्न धन की भी हानि होती है। इसलिए अप्रैल 2023 तक का गुरु गोचर शुभ नहीं है। 22 अप्रैल से गुरु मेष राशि में रहेंगे, इसका श्रेष्ठ फल मिलेगा। बृहस्पति चन्द्र लग्न से ग्यारहवें भाव में जब गोचरवश आता है तो धन और प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है। शत्रु पराजित होते हैं और समस्त कार्यों में सफलता मिलती है। विवाह तथा पुत्र जन्म का अवसर प्राप्त होता है। नौकरी में पदोन्नति और व्यापार में अवश्य ही वृद्धि होती है। उत्तम सुख की प्राप्ति होती है। वैभव विलास की वस्तुएं प्राप्त होती हैं। पुत्रों से तथा राज्याधिकारियों से सुख मिलता है। शुभ कार्यों में रुचि होती है तथा रति सुख में वृद्धि होती है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से दसवीं राशि में बृहस्पति गोचर का अशुभफल तथा ग्यारहवीं राशि में बृहस्पति गोचर का शुभफल बताया है।

कर्मण्यर्थस्थानपुत्रादिपीडा [3]

अर्थात् - बृहस्पति यदि जन्मराशि से दसवीं राशि में गोचर करे तो कार्यक्षेत्र में धन संबंधी या स्थान संबंधी (तबादला, पदहानि, सम्मानहानि) परेशानियाँ होती हैं। साथ ही संतान को या संतान से कष्ट प्राप्त होता है।

लाभे पुत्रस्थानमानादिलाभो [4]

अर्थात् - यदि बृहस्पति जन्मराशि से लाभ भाव में गोचर करे तो पुत्रलाभ, पद या स्थान का लाभ, सम्मान या पुरस्कार की प्राप्ति आदि लाभ मिलते हैं।

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो मिथुन राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में शुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी मिथुन राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[5] यह दोनों राशियाँ क्रमशः मिथुन से ग्यारहवीं और दसवीं है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से ग्यारहवीं तथा दसवीं दोनों ही राशियों में राहु गोचर का शुभफल बताया है।[6] जन्म राशि से ग्यारहवीं राशि में स्थित राहु सौभाग्य तथा जन्मराशि से दसवीं राशि में स्थित राहु लाभ प्रदान करता है।[7] गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से ग्यारहवें और दसवें भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है –  राहु चन्द्र लग्न से ग्यारहवें भाव में जब गोचरवश आता है तो शुभ कार्यों में प्रवृत्ति होती है। दान-पुण्यादि में रुचि बढ़ती है; परन्तु धन तथा भाग्य की हानि होती है। पुत्रों को कष्ट पहुँचता है। मित्रों से हानि होती है। राहु चन्द्र लग्न से दशम भाव में जब गोचरवश जाता है तो गंगादि तीर्थों में स्नान का अवसर आता है। दान-पुण्य करने को जी चाहता है। मान में अकस्मात् वृद्धि होती है। कार्य सफल होते हैं। परन्तु शत्रु भी उत्पन्न हो जाते हैं।

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 60% शुभता और शनि के कारण 40% अशुभता रहेगी ।

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं –

  • ·       मानसिक अशान्ति रहेगी
  • ·       धर्म से मन भटकेगा दृढ़तापूर्वक मन को धर्म में जोड़े रखें ।
  • ·       किसी ज्येष्ठ या आदरणीय रिश्तेदार की मृत्यु संभावित है ।
  • ·       दुःख, रोग एवं शत्रुओं की वृद्धि होगी ।
  • ·       रोजमर्रा के कार्यों में भी कुछ-कुछ विघ्न उपस्थित होंगे ।

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

  • Ø  गुरु व शनि विशेष पूज्य हैं।
  • Ø  हनुमानचालीसा तथा सुन्दरकाण्ड रामायण पाठ से विघ्न दूर होंगें ।  
  • Ø  रोगियों, बूढ़े तथा अशक्तजनों की सेवा करने से सकल मनोरथ पूर्ण होंगे।
  • Ø  नित्य विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।
  • Ø  सुनहला रत्न 6 कैरट या उस से अधिक वजन का धारण करें।
  • Øएकादशी का व्रत करें ।



[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.23 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[5] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[6] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.2 पृष्ठ सं.621 मोतीलाल बनारसीदास

[7] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.24 पृष्ठ सं.637 मोतीलाल बनारसीदास

वृष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 वृष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023


वृष राशि वाले जातकों के लिए यह वर्ष मध्यम फलदायक है। हालाँकि इस वर्ष वृष राशि वाले जातकों के जीवन में अर्थार्जन के मार्ग प्रशस्त होंगे साथ ही विद्यार्थियों के विद्यार्जन में उपस्थित विघ्न-बाधायें दूर होंगी। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। विवाह के इच्छुक लोगों के जीवन साथी के अन्वेषण की दिशा में चल रहे प्रयास सफल होंगे तथा संतान से उत्तम सुख की प्राप्ति होगी। व्यापार में बाधा होगी लेकिन आजीविका के स्रोत बढ़ेंगे, उच्चाधिकारियों से सम्पर्क होगा, व्यवसाय में लाभ एवं न्यायालीय कार्यों में सफलता मिलेगी। स्वजनो से विवाद संभव है परन्तु भूमि-भवन वाहन की प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास सफल होंगे। स्वास्थ्य में बाधा तथा उदर विकार संभव है। अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही आपको चिकित्सालय तक पहुँचा सकती है। माता-पिता का स्वास्थ्य कुप्रभावित हो सकता है, इस विषय में विशेष ध्यान दें। इस वर्ष कई धार्मिक व माङ्गलिक कार्य होंगे। वर्ष के उत्तरार्द्ध में आर्थिक प्रगति होगी तथा यश में वृद्धि होगी। आकस्मिक रुप से पारिवारिक सुख में बाधा पहुँचने से कष्ट होगा। सरकारी कर्मचारियों का स्थान परिवर्तन तथा पदोन्नति का योग है। सुरक्षा कर्मियों हेतु यह वर्ष कष्टकारी होगा। वर्ष के फरवरी, मार्च, जून, अक्टूबर मास कष्टदायी होंगे। 



इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि वृष से दसवीं राशि है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से दसवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

दुर्व्यापारप्रवित्तिं कलयति दशमे मानभङ्गं रुजं वा [1]

अर्थात् – जब  शनि जन्मराशि से दसवीं राशि में गोचर करता है तब जातक को ऐसे व्यापार में प्रवृत्त करता है जो उसके अनुकूल नहीं है और ऐसे व्यापार में प्रवृत्त होकर जातक कई तरह के नुकसान उठाता है अथवा कुछ परिस्थिति ऐसी उत्पन्न हो जाती है कि व्यक्ति गलत काम कर बैठता है और अपमान तथा नुकसान प्राप्त करता है। साथ ही   दशमराशिगत शनि मानभंग कराता है और बहुत कष्टकारी रोग भी देता है

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः वृष से ग्यारहवीं और बारहवीं है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से बारहवीं राशि में बृहस्पति गोचर का अशुभफल तथा ग्यारहवीं राशि में बृहस्पति गोचर का शुभफल बताया है।

लाभे पुत्रस्थानमानादिलाभो [3] 

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि से ग्यारहवीं राशि में गोचर करे तो पुत्र लाभ होता है, स्थानलाभ (नयी जगह जाना, नया पद मिलना आदि) होता है तथा सम्मान की वृद्धि होती है।

रिःफे दुःखं साध्वसं द्रव्यहेतोः[4]

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि से बारहवीं राशि में गोचर करे तो द्रव्य सम्बन्धी दुःख तथा भय, चिन्ता, उद्वेग आदि अशुभ फल होते हैं 

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो वृष राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में शुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी वृष राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[5] यह दोनों राशियाँ क्रमशः वृष से बारहवीं और ग्यारहवीं है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से बारहवीं राशि में राहु गोचर का अशुभफल तथा ग्यारहवीं राशि में राहु गोचर का शुभफल बताया है।[6] जन्म राशि से ग्यारहवीं राशि में स्थित राहु सौभाग्य तथा जन्मराशि से बारहवीं राशि में स्थित राहु व्यय प्रदान करता है।[7] गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से ग्यारहवें और बारहवें भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है –  “राहु चन्द्र लग्न से ग्यारहवें भाव में जब गोचरवश आता है तो शुभ कार्यों में प्रवृत्ति होती है दान पुण्यादि में रुचि बढ़ती है; परन्तु धन तथा भाग्य की हानि होती है। पुत्रों को कष्ट पहुँचता है। मित्रों से हानि होती है। राहु चन्द्र लग्न से द्वादश भाव में जब गोचरवश आता है तो व्यय अधिक होता है। सुख का नाश होता है। घर छोड़ दूर जाना पड़ता है, बन्धन (जेल की यात्रा या अपहरण) की भी संभावना रहती है। धन एवं पशु-सुख की हानि होती है।“

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 50% शुभता और राहु एवं शनि के कारण 50% अशुभता रहेगी ।

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं –

·       कार्यक्षेत्र को लेकर सचेत रहें ।

·       मानभंग को लेकर सचेत रहें ।

·       व्ययाधिक्य को लेकर सावधान रहें

·       स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें ।

·       किसी से न उलझें सावधान रहें ।

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

v गुरु व शनि विशेष पूज्य हैं।

v हनुमानचालीसा का नित्यपाठ करें ।

v  प्रत्येक शनिवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ करें ।

v  रोगिजनों बूढ़े व अशक्तजनों की सेवा करने से सकल मनोरथ पूर्ण होंगे।

v सुनहला 6 से 8 रत्ती और लाजवर्त 12 रत्ती या उस से बड़ा धारण कर सकते हैं ।

v एकादशी का व्रत करें ।

v प्रतिदिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जप करें।


-        ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

(लब्धस्वर्णपदक) 

 



[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.23 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[5] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[6] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.2 पृष्ठ सं.621 मोतीलाल बनारसीदास

[7] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.24 पृष्ठ सं.637 मोतीलाल बनारसीदास

Wednesday, 26 July 2023

मेष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

    मेष राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

यह वर्ष मेष राशि वाले जातकों के लिए मध्यमोत्तम अर्थात् मिश्रित फलदायक है। यदि शुभ फलों की ओर नजर डालें तो धन प्राप्ति के मार्ग में उपस्थित बाधायें दूर होंगी। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। धन लाभ तथा धनवृद्धि होगी लेकिन वित्तिय लेन देन में सचेत रहें। स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी कम होगी लेकिन मानसिक कष्ट संभव है, भ्रम की स्थिति बनेगी, माता के स्वास्थ्य में बाधा होगी। भूमि-भवन वाहन प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास सफल हो सकते हैं। विशेषरूप से वाहन का क्रय संभव है। आजीविका प्राप्ति की दिशा में चल रहे प्रयास तो सफल होंगे, परन्तु नौकरी पेशा वाले जातक के साथ षड़यंत्र व कपटपूर्ण आचरण होना संभव है, कार्यों में बाधा आयेगी। मेष राशि के सरकारी कर्मचारियों की व्यस्तता रहेगी। कुटुम्बीजनों का सहयोग प्राप्त होगा और शत्रुगण पराभव को प्राप्त होंगे।  अशुभ फलों में मेष राशि के छात्रवर्ग के प्रतियोगी परीक्षा परिणाम में विघ्न बाधायें उपस्थित होंगी। आलस्य व प्रमाद आपके विकास पथ पर बाधा उपस्थित करेंगे। विपरीत लिंगियों से सावधान रहें, अन्यथा सफलता में बाधा उपस्थित हो सकती है। मेष राशि के स्त्री वर्ग को विशेष कष्ट का सामना करना होगा। जीवनसाथी के चयन की दिशा में चल रहे प्रयासों में बाधायें आयेंगी। पारिवारिक तथा वैवाहिक जीवन में सकारात्मकता की कमी होगी। संतति सुख में बाधा उत्पन्न हो सकती है, लेकिन उनकी प्रगति होगी। भोगवादी प्रवृत्ति से बचें, अपने क्रोध संवेग पर पूर्ण नियन्त्रण रखें, अन्यथा प्रगति पथ से विमुख हो सकते हैं। न्यायालयीय कार्यों में कष्ट होगा। वर्ष 2023 के जनवरी, मार्च, जुलाई और नवम्बर मास विशेष कष्टदायी हैं। मेष राशि वालों पर इस वर्ष साढ़ेसाती या ढैया का कोई प्रभाव नहीं है। 



गोचर विचार में सबसे महत्वपूर्ण होता है शनि का विचार करना। इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि मेष से ग्यारहवीं राशि है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से ग्यारहवीं राशि में शनिगोचर का फल इस प्रकार कहा है –

सौख्यान्येकादशस्थो बहुविधविभवप्राप्तिमुत्कृष्ट कीर्ति [1]

अर्थात् – जब शनि जन्मकालीन चन्द्र राशि से एकादशवीं राशि में भ्रमण करे तो शुभ फलकारक होता है। इस दौरान सब प्रकार के सुख, बहुत प्रकार के वैभव, उत्कृष्ट कीर्ति आदि शुभ फल होते हैं।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः मेष से बारहवीं और पहली है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से बारहवीं और पहली दोनों राशियों में बृहस्पति गोचर का अशुभफल ही बताया है।

जीवे जन्मनि देशनिर्गमनमप्यर्थच्युतिं शत्रुतां [3]

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि में ही गोचर करे तो देश या अपने स्थान से बाहर जाना, धन का अत्यन्त व्यय या नाश, शत्रुता आदि अनिष्ट फल होते हैं।

रिःफे दुःखं साध्वसं द्रव्यहेतोः[4]

अर्थात् – यदि बृहस्पति जन्मराशि से बारहवीं राशि में गोचर करे तो द्रव्य सम्बन्धी दुःख तथा भय, चिन्ता, उद्वेग आदि अशुभ फल होते हैं 

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो मेष राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में अशुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी मेष राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[5] मेष राशि मेष से प्रथम ही है, गोचर विचार ग्रन्थ में जगन्नाथ भसीन जी ने यवानाचार्य का मत हिमगोः पूजमसादेर्धनम् का कट्पयादि विधि से अर्थ करते हुए राहु के प्रथम भाव में गोचर करना भी शुभफल प्रदाता बताया है। गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से प्रथम भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है – 

“राहु चन्द्र लग्न में यदि गोचरवश आ जावे तो मान में वृद्धि हो, धन सम्पत्ति बढ़े, पुत्रों के धन में वृद्धि हो। चूँकि राहु चन्द्र का शत्रु है, अतः मानसिक व्यथा भी हो”।[6] 

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 40% अशुभता और राहु एवं शनि के कारण 60% शुभता रहेगी।

 

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं -

  • ·       दुर्घटना को लेकर सावधान रहें।
  • ·       पत्नी-पुत्र एवं परिवार के स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहें।
  • ·       मानसिक अशान्ति को लेकर सावधान रहें।
  • ·       धन के व्यवहार में सावधानी बरतें।
  • ·       यात्रा को यथासम्भव टालने का प्रयास करें।
  • ·       शत्रुओं से सचेत रहें।

 

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

  • Ø  आवर्षान्त राहु, केतु तथा गुरु विशेष पूज्य हैं ।
  • Ø  नित्य विष्णुसहस्रनामस्तोत्र का पाठ अथवा श्रवण करें ।[7]
  • Ø  गुरुवार को फल, फूल तथा मिष्ठान का किसी धर्मस्थान में दान करें ।
  • Ø  भाईयों के सहयोग व सेवा एवं बड़े बुजुर्गों की सेवा से सकल मनोरथ पूर्ण होंगे।
  • Ø  माता-पिता एवं गुरुजनों का आशीर्वाद विशेष कल्याणदायक होगा।



- ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.23 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.18 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.20 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[5] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[6] गोचर विचार जगन्नाथ भसीन अ.1 पृष्ठ सं. 26, रंजन पब्लिकेशन्स

[7] नित्यकर्म पूजाप्रकाश, श्रीलालबिहारी मिश्र, स्तुति प्रकरण, पृष्ठ सं. 322, गीताप्रेस गोरखपुर


 

Friday, 12 May 2023

गुरुजी के महत्वपूर्ण संस्मरण

 गुरुजी के महत्वपूर्ण छायाचित्र















गुरुजी की जन्मकुण्डली

 गुरुजी की जन्मकुण्डली




जन्म दिनांक - 24 नवम्बर 1930

जन्मसमय - 08:18pm

जन्मस्थान - लोहरदगा

जन्मतिथि - पञ्चमी

जन्मवार - सोमवार

जन्मनक्षत्र - उत्तराषाढ़ा

जन्मयोग - गण्ड

जन्मकरण - बव