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Tuesday, 1 August 2023

कुम्भ राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 

कुम्भ राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

-        ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

(लब्धस्वर्णपदक)

Mob.- +91 9341014225.

कुम्भ राशि के जातकों के लिए यह वर्ष विशेषरूप से अशुभ फलदायक है। शनि की साढ़ेसाती उलझनें प्रदान करती रहेंगी। स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें, अस्थिजोड़ तथा जठर से सम्बन्धित रोगों से कष्ट होगा। सन्तति सुख में अवरोध उपस्थित होगा लेकिन सन्तति सुख प्राप्ति में किये गए प्रयास सफल होंगे। सर्वदा आपके धर्म एवं धैर्य की परीक्षायें होती रहेंगी। आपको अपने व्यवहारिक परुषता का त्याग करना होगा। विद्यार्थियों को विद्याक्षेत्र में श्रम से सफलता मिलेगी। क्रोध संवेग पर पूर्ण नियंत्रण रखें अन्यथा सर्वत्र विरोध का सामना करना पड़ेगा। जीवनसाथी के अन्वेषण में अवरोध उपस्थित होंगे। लेकिन विवाहित लोगों के दाम्पत्य जीवन में सुख होगा। अर्थसंग्रह में बाधा उपस्थित होगी। कुटुम्बी जनों के असन्तोष से आपके मन में क्षोभ उत्पन्न हो सकता है। अपने आहार एवं वाणी पर पूर्ण नियन्त्रण रखें। आर्थिक क्षेत्र में प्रयासो में सफलता मिलेगी। व्यवसाय का प्रसार होगा। अन्य स्रोत से आकस्मिक लाभ संभव है, सर्राफा व्यवसाय में लाभ होगा। ऋण तथा वित्त संबंधी लेन देन में सचेत रहें, भूमि सम्पत्ति आदि कार्यों में हानि तथा बाधा आयेगी। आजीविका क्षेत्र में सामन्जस्यता का अभाव होगा। नौकरी पेशा वाले जातक व्यस्त रहेगें। वर्ष 2023 के जनवरी, मार्च, मई तथा सितम्बर मास कष्टदायी हैं।





गोचर विचार में सबसे महत्वपूर्ण होता है शनि का विचार करना। इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि कुम्भ से पहली राशि है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से पहली राशि में शनिगोचर का फल रोगाशौचक्रियाप्तिं[1] कहा है।अर्थात् जब शनि जन्मकालीन चन्द्र राशि में ही भ्रमण करे तो बहुत अशुभ फलकारक होता है। इस दौरान दुःसाध्य रोग होते हैं। साथ ही परिवार में किसी की मृत्यु के कारण जातक को अशौच होता है।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः कुम्भ से दूसरी और तीसरी है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से दूसरी और तीसरी दोनों राशियों में बृहस्पति गोचर का अशुभफल ही बताया है।

प्राप्नोति द्रविणं कुटुम्बसुखमप्यर्थे स्ववाचां फलम् ॥

अर्थात् - यदि बृहस्पति जन्मराशि से दूसरी राशि में गोचर करे तो धनप्राप्ति, कुटुम्बसुख अपनी वाणी का इष्टफल  अर्थात् उसकी बात को लोग ध्यान से सुनें या अपनी वाणी द्वारा जातक धन प्राप्त होना आदि शुभफल होते हैं।

दुश्चिक्ये स्थितिनाशमिष्टवियुति कार्यान्तरायं रुजं ॥

अर्थात् - यदि बृहस्पति जन्मराशि से तीसरी राशि में गोचर करे तो स्थितिनाश अर्थात् जगह छूटे या स्थानपरिवर्तन या आर्थिक या सामाजिक स्थिति में अंतर आना, अपने इष्ट जनों से वियोग कार्य में विघ्न, रोग आदि अशुभफल होते हैं।

इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से तो वृष राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में मिश्रित फलों की पुष्टता हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी कुम्भ राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[3] यह दोनों राशियाँ क्रमशः कुम्भ से तीसरी और दूसरी है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से तीसरी राशि में राहु गोचर का शुभफल तथा दूसरी राशि में राहु गोचर का अशुभफल बताया है।[4] जन्म राशि से तीसरी राशि में स्थित राहु सुख तथा जन्मराशि से दूसरी राशि में स्थित राहु धननाश प्रदान करता है।[5]

गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से तीसरे भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है -

राहु चन्द्र लग्न से तृतीय भाव में जब गोचरवश आता है तो शत्रुओं पर विजय हो, धन का लाभ हो, अकस्मात् भाग्य जाग उठे तथा मित्रों से लाभ रहे।

गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से दूसरे भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है –

राहु चन्द्र लग्न से द्वितीय भाव में जब गोचरवश आ जाए तो धन की अकस्मात् हानि हो। कुटुम्ब वालों से अनबन रहे विद्या में रुचि न हो। शत्रु अधिक बन जाए। आँख में कष्ट हो।

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 20% शुभता और राहु, गुरु एवं शनि के कारण 80% अशुभता रहेगी ।

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं -

·       दुर्घटना को लेकर सावधान रहें।

·       धन एवं संचित सम्पदा के नाश को लेकर सावधान रहें।

·       संतान को लेकर सावधान रहें।

·       मानसिक अशान्ति को लेकर सावधान रहें।

·       धैर्य के साथ इस बुरे समय के व्यतीत होने की प्रतीक्षा करें आगे जीवन में कई शुभ फलों की प्राप्ति होनी है।

 

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

Ø   प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर शनिदशनाम का पाठ करें।[6]

Ø   प्रतिदिन स्नान के बाद दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें।[7]

Ø   शनिवार को शनि दीपदान करें।[8]

Ø   शनिवार को अश्वत्थस्तोत्र[9] का पाठ करते हुए पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करें।

Ø  अनुकूलता प्राप्ति हेतु घोड़े के नाल या नाव के कील से बनी लोहे की अँगूठी धारण करें।

Ø   हनुमदाराधना के साथ सुन्दरकाण्ड का पाठ करें।

Ø  पीपल व गूलर के वृक्ष लगाने से एवं उनकी सेवा करने से आपको सार्वत्रिक सफलता मिलेगी।

 

 



[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.22 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.2 पृष्ठ सं.621 मोतीलाल बनारसीदास

[5] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.24 पृष्ठ सं.637 मोतीलाल बनारसीदास

[6] कोणस्थ पिङ्गलो बभ्रुः कृष्णः रौद्रान्तको यमः, शौरी शनिश्चरो मन्दः पिप्पलाश्रयः संस्तुतः।

   एतानि  दश  नामानि  प्रातरुत्थाय यो पठेत् शनिश्चरो कृता पीड़ा न कदाचित् भविष्यति।।

[7] https://www.bhaktibharat.com/mantra/dashratha-shani-sotra

[8]https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=579770947498176&id=100063958274060&mibextid=Nif5oz

[9] नित्यकर्म पूजाप्रकाश, श्रीलालबिहारी मिश्र, स्तुति प्रकरण, पृष्ठ सं. 336, गीताप्रेस गोरखपुर

मकर राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 

मकर राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

-        ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

(लब्धस्वर्णपदक)

Mob.- +91 9341014225.

मकर राशि के जातक वर्ष 2017 से ही शनि की साढेसाती से गुजर रहे हैं।[1] जब जन्मराशि से 12वें भाव में शनि गोचरवश आता है तब साढे़साती प्रारम्भ होती है तथा शनि के जन्मराशि तथा उससे दूसरे भाव से निकलकर तीसरे भाव में आ जाने तक रहती है। इस प्रकार शनि जन्मराशि सहित तीन राशियों (बारहवें, चन्द्र लग्न और द्वितीय) में 7.5 वर्ष भ्रमण कर लेता है।[2] साढेसात वर्ष तक जन्मराशि को प्रभावित करने के कारण ही इसे साढेसाती कहा जाता है। मकर राशि वालों के ऊपर साढेसाती अपने अंतिम चरण में चल रही है। वर्तमान में शनि उनकी राशि से द्वितीय अर्थात् कुम्भ में गोचर कर चुके हैं।[3] अतः साढेसाती अब मात्र 2.5 वर्ष ही शेष बची है। हाँलाकि साढेसाती का प्रभाव दशा के आधार पर एवं अष्टकवर्ग में प्राप्त शुभरेखा के आधार पर अलग अलग जातक के ऊपर भिन्न-भिन्न दिखाई पड़ता है। लेकिन सामान्यतया मकर राशि के जातकों के लिए वर्ष 2023 कैसा रहेगा इसका विवरण अर्थात् मकर राशि वालों का वार्षिक राशिफल साढेसाती के आलोक में प्रस्तुत किया जा रहा है। शनि की साढ़ेसाती की उग्रता के कारण इस वर्ष के ज्यादातर फल अशुभता लिए हुए होंगे। दुर्घटना अथवा अनावश्यक वाद विवाद होना संभावित है। वर्ष का पूर्वार्द्ध विशेषरूप से संघर्षों से भरा हुआ रहेगा। पूर्व से चले आ रहे प्रगतिशील कार्यों में बाधाएँ उत्पन्न होंगी। मन भ्रम की स्थिति में रहेगा जिसके कारण निर्णय क्षमता में कमी आएगी। धन का अपव्यय होगा और संचित धन अथवा वैभव नष्ट होंगे। मानसिक अशांति के कारण कार्यक्षेत्र के सहकर्मचारियों अथवा लोगों के साथ मनमुटाव होगा। इसी प्रकार दाम्पत्य जीवन में भी तालमेल कम ही रहेगा। रिश्तेदारों से भी सामञ्जस्य का अभाव रहेगा। माता-पिता एवं घर के बुजुर्गों की स्वास्थ्य संबंधी चिन्ता रहेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि संभव है। सन्तान संबंधी बातें भी चिन्ता का विषय बनेंगी। वर्ष के अन्त में कुछ व्यावसायिक लाभ हो सकता है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से द्वितीय में शनिगोचर का फल धनसुतविहतिं[4] कहा है अर्थात् शनि यदि जन्मराशि से द्वितीय में शनि गोचर करे तो विशेष रुप से धनहानि और संतान हानि होती है। इसलिए इन दो विषयों को लेकर मुख्यरुप से सावधान रहने की आवश्यकता है।





गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन और मेष राशि में रहेंगे। यह दोनों राशियाँ क्रमशः मकर से तीसरी औरे चौथी हैं। जन्मराशि से तीसरी या चौथी राशि का बृहस्पति अशुभफल ही देता है। मंत्रेश्वर ने तो फलदीपिका में जन्मराशि से तृतीय और चतुर्थ को बृहस्पति का वेधस्थान बताया है।[5] इस प्रकार बृहस्पति के पक्ष से भी मकर राशि वालों के लिए वर्ष 2023 में अशुभता की अधिकता ही पुष्ट हो रही है।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी मकर राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेगा। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[6] मीन राशि मकर से तृतीय है राहु का तृतीय भाव में गोचर करना शुभफल प्रदान करता है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में तृतीय राशि को राहु का शुभ गोचर बताया है।[7] गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से तृतीय भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है - राहु चन्द्र लग्न से तृतीय भाव में जब गोचरवश आता है तो शत्रुओं पर विजय हो, धन का लाभ हो, अकस्मात् भाग्य जाग उठे तथा मित्रों से लाभ रहे।[8]

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु के कारण 33% शुभता और शनि एवं बृहस्पति के कारण 66% अशुभता रहेगी।

 

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं -

* दुर्घटना को लेकर सावधान रहें।

* धन एवं संचित सम्पदा के नाश को लेकर सावधान रहें।

* संतान को लेकर सावधान रहें।

* मानसिक अशान्ति को लेकर सावधान रहें।

* धैर्य के साथ इस बुरे समय के व्यतीत होने की प्रतीक्षा करें आगे जीवन में कई शुभ फलों की प्राप्ति होनी है।

 

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है -

* प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर शनिदशनाम का पाठ करें।[9]

* प्रतिदिन स्नान के बाद दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें।[10]

* शनिवार को शनि दीपदान करें।[11]

* शनिवार को अश्वत्थस्तोत्र[12] का पाठ करते हुए पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करें।

* प्रतिदिन विष्णुसहस्रनामस्तोत्र का पाठ करें।[13]

 



[1] https://www.drikpanchang.com/planet/transit/shani-transit-date-time.html?year=2017£

[2] गोचर विचार जगन्नाथ भसीन अ.4 पृष्ठ सं. 45, रंजन पब्लिकेशन्स

[3] विद्यापीठ-पञ्चाङ्ग पृष्ठ सं. 45, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.22 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[5] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.07 पृष्ठ सं.625 मोतीलाल बनारसीदास

[6] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114

[7] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.02 पृष्ठ सं.621 मोतीलाल बनारसीदास

[8] गोचर विचार जगन्नाथ भसीन अ.1 पृष्ठ सं. 26, रंजन पब्लिकेशन्स

[9] कोणस्थ पिङ्गलो बभ्रुः कृष्णः रौद्रान्तको यमः, शौरी शनिश्चरो मन्दः पिप्पलाश्रयः संस्तुतः।

   एतानि  दश  नामानि  प्रातरुत्थाय यो पठेत् शनिश्चरो कृता पीड़ा न कदाचित् भविष्यति।।

[10] https://www.bhaktibharat.com/mantra/dashratha-shani-sotra

[11]https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=579770947498176&id=100063958274060&mibextid=Nif5oz

[12] नित्यकर्म पूजाप्रकाश, श्रीलालबिहारी मिश्र, स्तुति प्रकरण, पृष्ठ सं. 336, गीताप्रेस गोरखपुर

[13] नित्यकर्म पूजाप्रकाश, श्रीलालबिहारी मिश्र, स्तुति प्रकरण, पृष्ठ सं. 322, गीताप्रेस गोरखपुर

 

धनु राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

 

धनु राशि का वार्षिक फलादेश वर्ष 2023

-        ब्रजेश पाठक ज्यौतिषाचार्य

(लब्धस्वर्णपदक)

Mob.- +91 9341014225.

धनु राशि के जातकों के लिए यह वर्ष सामान्य फलदायक है। अपने आप पर किया गया अति विश्वास कदाचित् आपके लिए प्रतिकूल फलदायक होगा। सन्तान का स्वास्थ्य व व्यवहार आपके मानसिक शान्ति को भंग करेगा। भूमि भवन वाहन सुख की प्राप्ति में चल रहे प्रयासों में विघ्न-बाधाएँ उपस्थित होंगी। विवाहार्थियों के जीवनसाथी के अन्वेषण में चल रही विघ्न बाधायें दूर होंगी। भाई-बहनों का स्वास्थ्य और व्यवहार आपको व्यथित कर सकता है। आपके पुरुषार्थ साहस तथा पराक्रम से आपके अन्यान्य कार्य सिद्ध होंगे। विद्यार्थियों को सफलता प्राप्ति हेतु किए गए श्रम सफल सिद्ध होंगे। घर में मांगलिक कृत्यों का सम्पादन होगा। अध्यात्म में चित्त वृत्ति लगेगी। ऐसी चित्त वृत्ति आपके विकास में सहायक सिद्ध होगी। जीवन साथी के स्वास्थ्य का पूर्ण ध्यान रखें। व्यवसाय तथा रोजगार में साधरण आय होगी, मंदी का रुख रहेगा। सहकारी कर्मचारियों की व्यस्तता होगी। सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता बढ़ेगी। पदोन्नति का योग है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जातक, प्रकाशक, लेखक, पत्रकार एवं अन्य बुद्धिजीवियों को यश प्राप्ति होगी। संगीत से जुड़े लोगों का यह मे वर्ष मिश्रित फल देगा। दूरस्थ यात्रा का योग है। धार्मिक कार्यों में है अभिरुचि बढ़ेगी एवं शुभ कार्य सम्पन्न होगें। स्वास्थ्य में अल्प बाधा रहेगी। मानसिक तनाव होगा। आर्थिक तथा वित्तिय लेन देन तथा पूंजी निवेश में सचेत रहे। व्यवसायिक क्षेत्र में बाधा आयेगी। किसी नवीन व्यवसाय का योग बनेगा। वर्ष 2023 के मार्च, मई, जुलाई तथा नवम्बर मास कष्टदायी हैं।





गोचर विचार में सबसे महत्वपूर्ण होता है शनि का विचार करना। इस वर्ष 17 जनवरी 2023 से शनि कुम्भ राशि में गोचर कर चुके हैं और वर्षपर्यन्त इसी राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि धनु से तीसरी राशि है। फलदीपिका नामक ग्रन्थ में मन्त्रेश्वर ने जन्मराशि से तीसरी राशि में शनिगोचर का फल स्थानभृत्यार्थलाभं[1] कहा है। अर्थात् जब शनि जन्मकालीन चन्द्र राशि से तृतीय राशि में भ्रमण करे तो स्थानलाभ नयी जगह या नौकरी की प्राप्ति या नवीन रोजगार की प्राप्ति होती है। अच्छा पद मिलता है जिसमें अपने अन्तर्गत बहुत से नौकर कार्य करते हों। साथ ही  धनलाभ आदि शुभफल प्राप्त होते हैं।

गोचर विचार के दौरान शनि के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह होता है बृहस्पति। क्योंकि शुभफलों की पुष्टता के लिए बृहस्पति को उत्तरदायी बताया गया है। इस वर्ष बृहस्पति मीन राशि में 21 अप्रैल 2023 तक और उसके बाद वर्षभर मेष राशि में रहेंगे।[2] यह दोनों राशियाँ क्रमशः धनु से चौथी और पांचवीं है। मंत्रेश्वर ने फलदीपिका में जन्मराशि से चौथी राशि में बृहस्पति गोचर का अशुभफल और पांचवीं राशि में बृहस्पति गोचर का शुभफल बताया है।

दुःखैर्बन्धुजनोद्भवैश्च हिबुके दैन्यं चतुष्पाद्भयम् ॥[3]

अर्थात् - यदि बृहस्पति जन्मराशि से चौथी राशि में गोचर करे तो बन्धुओं से दुःख, परम दीनता, चौपायों से भय आदि अशुभफल प्राप्त होते हैं।

पुत्रोत्पत्तिमुपैति सज्जनयुक्त राजानुकूल्यं सुते ॥[4]

अर्थात् - यदि बृहस्पति जन्मराशि से पांचवीं राशि में गोचर करे तो पुत्र की उत्पत्ति सन्तान सुख, सज्जनों से समागम, राजा की कृपा आदि शुभफल प्राप्त होते हैं।

वार्षिक राशिफल विचार में आधुनिक ज्योतिर्विद् राहु को भी विशेष महत्व देते हैं। अतः राहु का विचार भी धनु राशि के वार्षिक राशिफल के सन्दर्भ में प्रस्तुत करते हैं। राहु इस वर्ष मेष एवं मीन राशियों में रहेंगे। अक्टूबर तक राहु की स्थिति मेष राशि में रहेगी उसके बाद नवम्बर में राहु राशि परिवर्तन करके मीन राशि में आएँगे।[5] मेष राशि धनु से पञ्चम तथा मीन राशि चतुर्थ है। गोचर विचार ग्रन्थ में जगन्नाथ भसीन जी ने यवानाचार्य का मत हिमगोः पूजमसादेर्धनम् का कट्पयादि विधि से अर्थ करते हुए राहु के पञ्चम भाव में गोचर करने पर शुभफल प्रदाता तथा चतुर्थ भाव के गोचरगत राहु को अशुभफल प्रदाता  बताया है।

गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से पञ्चम भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है – 

राहु चन्द्र लग्न से पंचम भाव में जब गोचरवश आता है तो धन ऐश्वर्य में अचानक वृद्धि करता है। सट्टे आदि से लाभ करवाता है। भाग्य तथा आय में भी वृद्धि करता है, परन्तु इसकी चन्द्र पर नवम दृष्टि के कारण मानसिक व्यथा भी हो।

गोचर विचार में जगन्नाथ भसीन ने राहु का चन्द्रलग्न से पञ्चम भाव में गोचर का फल बताते हुए लिखा है – 

राहु चन्द्र लग्न से चतुर्थ भाव में जब गोचरवश आता है तो सुख का नाश करता है। राज्य के विरुद्ध विद्रोह की भावना होती है। पैतृक स्थान से दूर ले जाता है। सम्बन्धियों से कोई सहायता नहीं मिलती। सुख में कमी करता है।

इस प्रकार निष्कर्ष रुप में वार्षिक राशि फल को तीन भागों में बाँटे तो राहु एवं गुरु के कारण 30% अशुभता और राहु, गुरु एवं शनि के कारण 70% शुभता रहेगी ।

 

निष्कर्ष रुप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ हैं -

·       दुर्घटना को लेकर सावधान रहें।

·       पत्नी-पुत्र एवं परिवार के स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहें।

·       मानसिक अशान्ति को लेकर सावधान रहें।

·       धन के व्यवहार में सावधानी बरतें।

·       यात्रा को यथासम्भव टालने का प्रयास करें।

·       शत्रुओं से सचेत रहें।

 

अशुभ फलों के निराकरण हेतु सर्वसामान्य उपाय का निर्देश किया जा रहा है –

Ø  उपचारार्थ शनि एवं राहु का जप कराएँ ।

Ø  शिवजी की आराधना करें।

Ø  शनिवार को पीपल की १०८ प्रदक्षिणा करें।

Ø  पीपल लगावें।

Ø  गुरुवार को मीठा भोजन करें।

Ø  विष्णुसहस्रनामस्तोत्र का पाठ नित्य पाठ करें।

Ø  बड़े भाई, बहनोई, पिता, पितामहादि की सेवा करें उनके आशीर्वाद से सकल मनोरथ पूर्ण होंगे।

 

 

 



[1] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.22 पृष्ठ सं.635 मोतीलाल बनारसीदास

[2] श्रीजगन्नाथपञ्चाङ्गम् संवत् २०८०, प्रो.मदनमोहन पाठक, पृ.सं. 37

[3] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.19 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[4] फलदीपिका गोपेश कुमार ओझा अ.26 श्लो.19 पृष्ठ सं.633 मोतीलाल बनारसीदास

[5] Mishra’s Indian Ephemeris 2023, Dr. Suresh Chandra Mishra, Page no. 114